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कोरोना संकट के दौरान क्या NPS में निवेश करना है सुरक्षित, जानें महामारी से कैसे होगा असर

कोरोना वायरस की वजह से शेयर बाजार को बड़ा झटका लगा है और हाल ही में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से बुरी खबर आई है

कोरोना वायरस की वजह से शेयर बाजार को बड़ा झटका लगा है और हाल ही में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री से बुरी खबर आई है. ऐसे में बहुत से निवेशक अब इस बात को लेकर चिंता में हैं कि क्या नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) इस संकट के समय में निवेश का सुरक्षित ऑप्शन है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि NPS कोरोना वायरस के दौरान और उसके बाद सुरक्षित विकल्प है. NSDL e-Governance Infrastructure Ltd के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट अमित सिन्हा ने कहा कि NPS को रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए तैयार किया गया है जिसमें आप अपनी वृद्ध उम्र में पेंशन प्राप्त करने के लिए निवेश करते हैं.

उनके मुताबिक रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए निवेश की राशि और जितना जल्द शुरू करेंगे, उतने लंबे समय तक निवेश करेंगे, ये महत्वपूर्ण फैक्टर्स हैं जो सब्सक्राइबर को पेंशन के लिए पर्याप्त कॉर्पस जमा करने में मदद करते हैं.

NPS पर नहीं होगा असर

सिन्हा ने बताया कि वित्तीय संकट से लंबी अवधि के निवेश पर असर होता है. हालांकि, NPS से सब्सक्राइबर्स को अपनी दौलत को सही तरके से मैनेज करने में मदद मिलती है. सिन्हा के मुताबिक लंबी अवधि के निवेश में ऐसे वित्तीय संकट का अनुभव होने की उम्मीद रहती है. यह पहले भी हो चुका है और भविष्य में हो सकता है.

NPS में उपलब्ध निवेश के लचीले विकल्पों के साथ सब्सक्राइबर उपयुक्त एसेट मिक्स को चुन सकता है जिसमें वह उम्र, बाजार की स्थिति, रिस्क की क्षमता आदि फैक्टर्स पर ध्यान दे सकता है. इसलिए निवेश विकल्प के तौर पर NPS का महामारी से पहले और बाद की स्थिति से कुछ लेना-देना नहीं है.

 

क्या NPS के तहत निवेशकों के पैसों को सुरक्षा देने की कोई व्यवस्था है ?

सिन्हा ने कहा कि NPS एक रेगुलेटेड प्रोडक्ट है. PFRDA ने विस्तृत और व्यापक निवेश की गाइडलाइंस जारी की हैं जो सब्सक्राइबर्स के हितों की रक्षा करती हैं. पेंशन फंड्स के प्रदर्शन को PFRDA और NPS ट्रस्ट द्वारा सख्त तरीके से देखरेख में रखा जाता है जिससे निर्धारित निवेश के निर्देशों का पालन सुनिश्चित हो सके.

इसके अलावा NPS के अंदर निवेश इक्विटी तक नहीं सीमित होते हैं, वे दूसरी एसेट क्लास में भी होते हैं जिसमें सरकारी सिक्योरिटीज, कॉरपोरेट बॉन्ड आदि शामिल हैं.

उनके मुताबिक जहां तक सब्सक्राइबर्स का सवाल है, NPS में निवेश का पैटर्न चुनना का विकल्प दिया गया है जिसके साथ एक वित्तीय वर्ष में एसेट एलोकेशन को दो बार बदने का विकल्प मौजूद है और पेंशन फंड को वित्तीय वर्ष में एक बार बदने का है. इसलिए सब्सक्राइबर्स को मार्केट की स्थिति और रिस्क की क्षमता के आधार पर आवंटन बदलने का विकल्प है.

 

 

 

 

 

source :-Financial express

 

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