Soni Pariwar india

कोविड-19 खत्म होने के बाद खुले खाद्य तेल की बिक्री पर लग सकता है बैन, स्वास्थ्य कारणों को लेकर सरकार ले सकती है फैसला

नई दिल्ली.

कोविड-19 खत्म होने के बाद केंद्र सरकार खुले खाद्य तेलों की बिक्री को बैन कर सकती है। इन तेलों की शुद्धता और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को देखते हुए सरकार बैन लगाने पर विचार कर रही है। हालांकि, सरकार पहले भी इस पर विचार कर रही थी लेकिन कोविड-19 के सामने आने के बाद इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

पैकेज्ड और ब्रांडेड प्लेयर्स को होगा फायदा

शुक्रवार को कोविड-19 के बाद खाद्य तेल इंडस्ट्री के सामने आने वाली चुनौतियों पर एक वेबीनार में बोलते हुए सॉल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार खुले खाद्य तेलों की बिक्री पर बैन पर विचार कर रही है। चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार के इस कदम से पैकेज्ड और ब्रांडेड प्लेयर्स को अपनी बिक्री बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

soni pariwar india

गरीब राज्यों के लोग होंगे प्रभावित

यदि खुले खाद्य तेलों की बिक्री पर बैन लगता है तो गरीब राज्यों खासकर ग्रामीण क्षेत्र के लोग इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। ग्रामीण क्षेत्र में आज भी बड़ी संख्या में ग्राहक बेहद कम मात्रा यानी कुछ रुपए का खुला खाद्य तेल खरीदते हैं। इसका मतलब यह है कि ग्रामीण और रोजाना कमाने वाले उपभोक्ता अपनी जरूरत के मुताबिक रुपए की वैल्यू में खरीदारी करते हैं ना कि वजह के अनुसार। ऐसे उपभोक्ता अपनी रोजाना की कमाई के खाद्य तेल खरीदकर इस्तेमाल करते हैं।

ये भी पढ़ें:बीकानेर बी जे पी OBC मोर्चा अध्यक्ष हुकमा राम जी कांटा का किया सम्मान

खुले खाद्य तेल से करीब 50 फीसदी महंगा होता है पैकेज्ड तेल

मौजूदा समय में पैकेज्ड खाद्य तेल अपनी वैराइटी के आधार खुले तेल के मुकाबले करीब 50 फीसदी महंगे हैं। इसलिए खाद्य तेलों के उपयोग से बने उत्पाद भी महंगे होते हैं। रोजाना कमाने वालों और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के अलावा सड़क किनारे खाद्य पदार्थ बनाने वाले दुकानदार भी खुले खाद्य तेल का इस्तेमाल करते हैं। दुकानदारों को यह खुला खाद्य तेल ब्रांडेड और पैकेज्ड खाद्य तेल के मुकाबले सस्ता मिलता है।

2.3 करोड़ टन सालाना खाद्य तेल की खपत

एसईए के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर बी वी मेहता के मुताबिक, देश में सालाना करीब 2.3 करोड़ खाद्य तेलों की खपत है। एसईए के अनुमान के मुताबिक, इसमें से 40 फीसदी तेल की खपत रोजाना कमाने वाले और ग्रामीण क्षेत्र के लोग करते हैं। भारत अपनी खाद्य तेलों की कुल मांग का 65 फीसदी हिस्सा मुख्य तौर पर इंडोनेशिया, मलेशिया और अर्जेंटीना से आयात करता है।

soni pariwar india

लॉकडाउन के बाद बदल जाएंगे हालात

मेहता का कहना है कि देशव्यापी लॉकडाउन के खत्म होने के बाद खाद्य तेल समेत सभी प्रमुख उत्पादों की मार्केटिंग रणनीति में अहम बदलाव देखने को मिलेंगे। इसका कारण यह है कि भविष्य में लोग सेहत को ध्यान में रखते हुए अनब्रांडेड से ब्रांडेड और खुले के बजाए पैकेज्ड उत्पादों की ओर रूख करेंगे। चतुर्वेदी का कहना है कि देशव्यापी लॉकडाउन में होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विसेज बंद होने के कारण मांग काफी प्रभावित हुई है। इसमें कुछ नुकसान स्थायी है और कुछ अस्थायी है जिसके लॉकडाउन के बाद रिकवरी के आसार हैं। ऐसे में पैकेज्ड खाद्य तेल की बिक्री करने वाले प्लेयर इस अवसर का फायदा उठाने के लिए तैयार हैं।

ये भी पढ़ें:सोनी परिवार इंडिया वेब पोर्टल द्वारा स्वर्णसेना ग्रुप बीकानेर को सम्मानित पत्र देकर सम्मानित किया

स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा चिंतित रहेगा उपभोक्ता

कोरोना महामारी के दौरान कम बिक्री को देखते हुए रिटेल दुकानदारों ने खुले खाद्य तेल का स्टॉक कम कर दिया है। ओगिल्वी के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन इंडिया पीयूष पांडे का कहना है कि कोविड-19 के बाद हम रोबोट की तरह नहीं बदलेंगे लेकिन लाइफस्टाइल में बदलाव आएगा। कोविड-19 के बाद उपभोक्ता स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा चिंतित होगा। इस कारण वह स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद और कोलेस्ट्रॉल-फैट से मुक्त उत्पादों की तलाश करेगा।

soni pariwar india

source:-money bhaskar

Soni Pariwar India पर सबसे पहले स्वर्णकार समाज की खबर पढ़ने के लिए हमें यूट्यूबफेसबुक और ट्विटर व् इंस्टाग्राम पर फॉलो करें. देखिए अन्य लेटेस्ट खबरें भी

Read Previous

बीकानेर बी जे पी OBC मोर्चा अध्यक्ष हुकमा राम जी कांटा का किया सम्मान

Read Next

जूम 5.0 /आज से बदल जाएगा जूम ऐप, प्राइवेसी सर्विस में किया गया सुधार, कंपनी ने कहा- अब कंटेंट सुरक्षित रहेगा और हैक नामुमकिन

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WhatsApp chat